गुरुग्राम / लोकेश कुमार। शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर इंडियन नेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (आईएनएचआरसीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सिरोही भारतीय ने देश के सभी शिक्षकों, गुरुजनों और शिक्षाविदों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने राष्ट्र निर्माण, समाज सुधार और मानवाधिकारों के संरक्षण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया।
मुकेश सिरोही भारतीय ने कहा कि भारत में गुरु-शिष्य परंपरा अनादि काल से आदरणीय रही है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह आने वाली पीढय़िों के चरित्र, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना का सच्चा शिल्पकार होता है। एक सशक्त और न्यायपूर्ण समाज की नींव शिक्षकों के समर्पण पर ही टिकी होती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से बात रखते हुए कहा कि समाज में प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा का अधिकार दिलाना ही शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में शिक्षकों को न केवल छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्य विकसित करने हैं, बल्कि उन्हें मानवाधिकारों के प्रति जागरूक और संवेदनशील नागरिक भी बनाना है। मुकेश सिरोही भारतीय ने सरकार और समाज से अपील की कि शिक्षकों के सम्मान, गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक सशक्त, सुरक्षित और सम्मानित होगा, तभी देश का भविष्य उज्ज्वल और प्रगतिशील बनेगा।
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