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मंदिर, समाधि और गोशाला तोड़े जाने पर अखिल भारतीय संत समिति ने मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

गुरुग्राम / लोकेश कुमार। सेक्टर-50 स्थित ग्राम झाड़सा में 1930-31 में स्थापित सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर, नाथ समाज की समाधियों और गोशाला को ध्वस्त किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस कार्यवाही के विरोध में जहां ग्रामीणों ने मोर्चा खोला हुआ है, वहीं अब संतों का प्रतिनिधित्व करने वाली अखिल भारतीय संत समिति ने भी प्रदेश सरकार के नाम प्रशासन को ज्ञापन देकर मामले में निष्पक्ष और न्यायसंगत जांच करने की मांग की है। समिति के राष्ट्रीय प्रमुख (विधि प्रकोष्ठ) व सिद्धयोग मठ अखाड़ा के संस्थापक आचार्य बालयोगी डा. अलखनाथ अवधूत का कहना है कि एचएसवीपी द्वारा बिल्डरों और भूमाफियाओं के साथ साठगांठ कर वहां मौजूद महंत को अवैध हिरासत में लिया गया। इसके बाद मंदिर परिसर, गोशाला, समाधियों और लगभग 40 देवी-देवताओं की मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे जनसमुदाय में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यह स्थल 1930-31 में ग्राम पंचायत की स्वीकृति से 3.1 एकड़ भूमि पर बने जोहड़ के पास स्थित था, जहाँ आसपास के लोग नियमित रूप से पूजा-अर्चना और टहलने आते थे। विध्वंस के दौरान उठाई गईं लगभग 25-30 गोवंश, देव मूर्तियां और दानपेटी को अतिशीघ्र मंदिर संचालकों को वापस किया जाए। संत समिति ने प्रशासन से मांग की है कि इस धार्मिक आस्था के केंद्र और नाथ समाज की पुरातन पीठ को ध्वस्त करने में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और मंदिर परिसर को यथावत रूप में पुन: स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि नाथ संप्रदाय कभी भी जातिवाद, क्षेत्रवाद या संप्रदायवाद को बढ़ावा नहीं देता। अवधूत 12 पंथ नाथ योगी संप्रदाय के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपाध्यक्ष, अलवर के सांसद महंत बालकनाथ तथा उज्जैन के राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ महाराज जैसे संत सनातन हिंदू संस्कृति को संजोए हुए राष्ट्र सेवा में जुटे हैं। समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए तुरंत पुनर्निर्माण के आदेश दिए जाएं और संलिप्त अधिकारियों व भूमाफियाओं पर उचित कानूनी शिकंजा कसा जाए।

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