चंडीगढ़: हरियाणा में नए उद्योग स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने वाले उद्यमियों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। हरियाणा विधानसभा द्वारा मंगलवार को पारित हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल, 2026 के तहत अब विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को 15 कार्यदिवसों के भीतर ‘सर्टिफिकेट ऑफ इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ (CIPA) प्रदान किया जाएगा।
प्रमुख विशेषताएं और मुख्य बिंदु:
- 15 कार्यदिवसों में मंजूरी: उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला नोडल एजेंसी 15 दिनों के भीतर CIPA जारी करेगी। निर्धारित समयसीमा में निर्णय न होने पर डीम्ड अप्रूवल माना जाएगा।
- 36 माह की समयसीमा: उद्यमियों को प्रारंभिक मंजूरियों के इंतजार में अपना काम रोकने की आवश्यकता नहीं होगी। CIPA प्रमाण-पत्र 36 महीने तक वैध रहेगा, जिसके दौरान सभी आवश्यक नियमित अनुमतियां प्राप्त की जा सकेंगी।
- निरीक्षण व कार्रवाई से संरक्षण: 36 महीने की वैधता अवधि के दौरान छह प्रमुख विभागों के नियमित निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक रहेगी।
- सुरक्षा और जवाबदेही के कड़े प्रावधान: जन सुरक्षा, अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग उल्लंघन या अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में विभाग प्रमुख की सिफारिश या शिकायत के आधार पर निरीक्षण किया जा सकेगा।
- शिकायत निवारण प्रणाली: मोराटोरियम अवधि के दौरान किसी भी प्रतिकूल दंडात्मक कार्रवाई से प्रभावित उद्यमियों के लिए समयबद्ध शिकायत निवारण की व्यवस्था की गई है।
राज्य सरकार की ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ सोच पर आधारित यह विधेयक प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर कर प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और विश्वास-आधारित सुशासन को मजबूती प्रदान करेगा।
